Saturday, July 11, 2020
Crime

मां को घर से बेदखल करने वाले बेटों को सजा- महीने में एक दिन वृद्धाश्रम में बुजुर्गों की सेवा करेंगे, इसके फोटो कोर्ट में पेश करेंगे

बुजुर्ग मां का एक बेटा भेल में डीजीएम, दूसरा चार्टर्ड अकाउंटेंट, तीसरा बेंगलुरू की कंपनी में एम्पलॉई

भोपाल.66 साल की बुजुर्ग श्यामा देवांगन को घर से बेदखल करने वाले बेटे भले ही अब मां की सेवा कर रहे हैं। लेकिन एसडीएम मुकुल गुप्ता ने तीनों को दोषी मानते हुए माह में एक दिन वृद्धाश्रम में जाकर बुजुर्गों की सेवा करने का आदेश दिया है।

साथ ही यह भी कहा कि इस दौरान वो वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ फोटो खिंचवाएं। इसका रिकॉर्ड रखें और एसडीएम कोर्ट में पेश करें। ऐसा उन्हें छह महीने तक करना होगा। तीनों बेटों को हर माह की 5 तारीख तक 5-5 हजार रुपए मां के खाते में जमा करने होंगे।

…ताकि अहसास हो कि अकेले रह रहे बुजुर्ग की पीड़ा क्या होती है:बेटों को हर महीने में दो दिन परिवार समेत मां के साथ गुजारना पड़ेगा। उनकी देखरेख भी करना होगी। जब भी मां का जन्मदिन आएगा, बेटों को परिवार सहित उनके पास जाकर जन्मदिन मनाना होगा। इसके पीछे एसडीएम का तर्क था कि चूंकि मां ने यह लिखकर दिया है कि प्रॉपर्टी के दस्तावेज उन्हें मिल गए हैं। इसलिए बेटों को माफी दे दी जाए। लेकिन बेटों ने जिस तरह मां काे एक साल तक प्रताड़ित किया गया, वह माफी योग्य नहीं है। इसलिए बेटों के लिए यह आदेश दिया गया है कि वो मां की देखभाल के साथ-साथ वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों की भी सेवा करें। ताकि उनको इस बात का अहसास हो सके कि अकेले रह रहे बुजुर्ग की पीड़ा क्या होती है।

मां ने बताया- बेटे, बहू के साथ आए हैं:श्यामा देवांगन ने एसडीएम को सोमवार को फोन कर बताया कि उनके तीनों बेटे एक साल बाद उनके पास आए हैं। बहुओं को भी साथ लाए हैं। उनको गलती का अहसास हो गया है। अब उन्हें जेल मत भेजना।

…तो जेल जाना होगा:एसडीएम का कहना है कि भरण पोषण अधिनियम की धारा-24 के तहत आदेश जारी किया है। यदि इसका पालन नहीं किया गया तो बेटों को तीन महीने जेल में रहना होगा। 5 हजार जुर्माना भी देना होगा।

क्या है मामला… पिछले सप्ताह एसडीएम के यहां पर श्यामा देवांगन ने भरण पोषण अधिनियम के तहत केस दर्ज कराया था। इसमें कहा गया था कि उनके तीन बेटे हैं। एक बेटा अरुण देवांगन भेल में डीजीएम है। दूसरा दीपक देवांगन एमपी नगर में चार्टर्ड अकाउंटेंट है। तीसरा बेटा बेंगलुरु में एक कंपनी में कार्यरत है। बेटों ने मकान के दस्तावेज, एफडी और सोने-चांदी के जेवर रखकर उनको रायपुर भेज दिया था। एसडीएम कोर्ट में सुनवाई के बाद बेटों ने 6 लाख की एफडी, 10 तोले सोना और उनका घर एसडीएम के सामने मां को सौंप दिया।

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